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Monday, 27 November 2017

Rishte रिश्ते




रिश्तों को ख़त्म 
होने के लिए 
किसी बड़ी वजह की 
जरुरत नहीं 
एक ने कहा 
दूसरे ने सुना नहीं
उसने दुबारा कहने का
कष्ट नहीं किया 
दूसरे ने पूछना 
अपमानजनक समझा 
न किसी ने कुछ सोचा 
न पूछा, ना समझा 
और हो गया 
रिश्तों में बिखराव
इसी के साथ ही
पहन लिया दोनों ने
मुस्कुराहटों का मुखौटा 
मन में लिए तल्ख़ 
अहसासों के साथ


Wednesday, 15 November 2017

tanav ke sagar me dubti jivan naiyya तनाव के सागर में डूबती जीवन नैय्या



आज के आधुनिक दौर में हमने खुद को एक मशीन का रूप दे दिया है ! जीवन में कुछ करने की ललक और समाज में खुद को स्थापित करने की जिद मात्र से मनुष्य भीतरी स्वभाव से खोखला , असंवेदनशील एवं एकाकीपन का जीवन जी रहा है ! परिवारजनों के साथ बैठना कुछ पल उनके साथ बिताकर अपने और सबके सुख-दुःख की बातचीत , अब ये दौर पीछे छूट गया है !
                 कहने को तो आज हमारे पास एक-दूसरे से जुड़ने के कई माध्यम है , पर यह माध्यम केवल मशीनी माध्यम के तौर पर ही है, इसमें अपनत्व का अहसास कहाँ? ऐसे में युवा पीढ़ी एक दोहरी जिंदगी जी रही है ! एक मुखौटे का सहारा लिए, जहाँ बाहरी आवरण बहुत चमकदार है पर भीतर ही भीतर एक एकाकी जीवन है जहाँ कोई अपना ना दीखता हो जिससे वह अपने मन की बात कह सके ! एक घुटनभरी जिंदगी आखिर कबतक सहन कर सकता है कोई ? कई परिणाम हमारे सामने है , ऐसे तनावग्रस्त युवा द्वारा कई मामले हमारे सामने आए है जब युवा पीढ़ी ने तनावग्रस्त होकर आत्महत्या की है तो क्यों नहीं इसकी जाँच माता-पिता खुद करें ! अपने बच्चों से एक मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखें ! उसपर पढ़ाई या अन्य किसी भी बात का दबाव ना हो, घर का वातावरण मैत्रीपूर्ण हो , जिससे वे आपको अपने मन की बातें और तकलीफे खुले विचारों में सहज रूप से आपके सामने रख सके !
               परिवार के वरिष्ठ भी बच्चे की भावनाओं को समझते हुए उनकी इक्छा उनकी रूचि का सम्मान करते हुए उनको सही दिशा दें ! ऐसा ना हो की कहीं आपकी महत्वकांछा आपको आपके बच्चे से दूर कर दे ! बच्चों से जुड़ने का उनके मन से जुड़ने का एक प्रयास तो होना ही चाहिए ! क्यूंकि जीवन समाप्त हो जाएगा तो सब समाप्त हो जाएगा ! साड़ी की सारी महत्वकांछा धरी की धरी रह जाएगी और हाथ आएगी तो केवल हार ! इसलिए अपने इक्छाओं की अग्नि में अपने बच्चों के आहुति देना अपने ही कोख को सूना करना है बच्चे और माता-पिता दोनों को हो एक-दूजे की भावनाओं को समझाना होगा ! एक बात बच्चों को समझना बहुत जरुरी है कि माता -पिता से बढ़कर हमारा भला चाहनेवाला इस दुनिया में कोई नहीं है !
                                
                                                                

Sunday, 1 October 2017

sandesha संदेशा



कैसे हो साजन मेरे 
ना कोई संदेशा आया है
झूठी हँसी से चेहरा सजा है
मन का पुष्प मुरझाया है 
आँखे भी ना साथ निभाए 
रह-रह आँसू झलक आया है 
पिया मिलन को तरसे जियरा 
ना कोई संदेशा आया है
बाट जोहती दिन और रैना 
थक कर हार गए मोरे नैना
थोड़ी सुध -बुध यहाँ की भी ले लो
माँ-बाबूजी का हालचाल ही पूछ लो
ऐसे भी क्या व्यस्त हो रहते 
तुम बिन हम क्या कुछ है सहते
बिन पिया के जीना है कितना मुश्किल
पड़ोसिन चुभाती है हर वक्त तानों के कील
घूँट-घूँट तानों के पी रही हूँ
माँ-बाबूजी और बच्चों के लिए जी रही हूँ
चलो छोडो सबकुछ अब
लौट यहाँ तुमको आना है 
बहुत हो गई ये रुसवाई 
आ जाओ एक बार पिया जी
अब दूर न तुमको जाना है  


Thursday, 31 August 2017

prakriti प्रकृति


प्रकृति माँ की गोद निराली
इसमें समाहित दुनिया सारी
मिट्टी,वायु , शुद्ध जल
मानव उपयोगी प्रकृति का कण-कण 
पेड़ - पौधे ये हरियाली 
इनसे लगती दुनिया प्यारी
अशुद्ध हवा ग्रहण ये करते 
शुद्ध हवा हमको दे देते 
मिट्टी की महिमा है निराली
उपजाति है अन्न-धान की क्यारी
रिमझिम वर्षा की बूंदों से 
छा जाती है उपवन में हरियाली 
फिर भी मानव बाज ना आता 
हरपल कष्ट इन्हें पहुँचाता
जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण
और प्रदूषित धरती भी
वक्त रहते संभलना होगा
पर्यावरण संरक्षण करना होगा
प्रकृति कबतक सह पाएगी
एकदिन कहर बरसाएगी 
तब जागोगे तो क्या पाओगे 
हाथ धर बस पछताओगे

Sunday, 23 July 2017

kuch auraten कुछ औरतें


कुछ औरतें
कुछ औरतें आज भी
नापती है चरित्र की गहराई
घूँघट की लंबाई से...
वे कुछ औरते....
उन्होंने बना लिया है
अपना दायरा
और समेट लिया है
खुद को एक बिंदु के मद्द्य
पर वे नहीं जानती
की इस बिंदु से वे
खिंच सकती है
बहुत सारी रेखाएँ
अनगिनत रेखाएँ
वो संभाल सकतीं हैं
घूँघट के साथ ही लैपटॉप भी
और दे सकतीं है
खुद को खुला आसमान..
हौसलों के पंख
और कुछ करने की जिज्ञासा..
वे कुछ औरते
गुजारिश है उनसे
बढ़ाएं एक कदम
परिवर्तन की ओर...
वरना यूँ ही कहता रहेगा
पुरुष समाज
औरतें ही औरतों की दुश्मन है...
हमें उंगली नहीं दिखाना है
हाथ मिलाना है...

रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र

Sunday, 9 July 2017

pyari maa प्यारी माँ




अहसास का सुंदर भाव है माँ
डूबते हुवे जीवन की नाव है माँ
कभी प्यार कभी दुलार
कभी डांट कभी आशीर्वाद
कभी तपती दोपहरी में
शीतल ठंडी छाँव हैं माँ
कष्टों के गागर पर
ममता का सागर लिए
हरदम हरवक्त तैयार 
रहती है माँ
कभी माँ कभी सहेली कभी गुरु
हर किरदार निभाती है
मेरी जीवन की बगिया के 
सारे काँटों को तोड़
फूलों से भर देती है
सूखे - सूखे जीवन में
रिमझिम रिमझिम बरसात सी माँ
अहसास का सुंदर भाव है माँ
डूबते हुवे जीवन की नाव है माँ

रीना मौर्य मुस्कान

Tuesday, 9 August 2016

kainwas कैनवास



तितलियों से रंग ले आऊँ ओस की बूंदों संग उन्हें मिलाऊँ जीवन के कैनवास पर एक सुंदर चित्र बनाऊँ जहाँ बहती है नदिया और बहते हैं झरने तल्खियों से परै जहाँ हो सब अपने पूरे हों सबके वो प्यारे मीठे - सपने सुरज , चाँद , सितारों से आसमाँ सजाऊँ फूलों से खुशबू ले आऊँ प्रेम , करुणा , दया से सबका मन महकाऊँ आपका भी हाथ हो आपका भी साथ हो और सुन्दर से अपने सपने को मैं सच कर जाऊँ जीवन के कैनवास पर एक सुंदर चित्र बनाऊँ