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Sunday, 23 July 2017

kuch auraten कुछ औरतें


कुछ औरतें
कुछ औरतें आज भी
नापती है चरित्र की गहराई
घूँघट की लंबाई से...
वे कुछ औरते....
उन्होंने बना लिया है
अपना दायरा
और समेट लिया है
खुद को एक बिंदु के मद्द्य
पर वे नहीं जानती
की इस बिंदु से वे
खिंच सकती है
बहुत सारी रेखाएँ
अनगिनत रेखाएँ
वो संभाल सकतीं हैं
घूँघट के साथ ही लैपटॉप भी
और दे सकतीं है
खुद को खुला आसमान..
हौसलों के पंख
और कुछ करने की जिज्ञासा..
वे कुछ औरते
गुजारिश है उनसे
बढ़ाएं एक कदम
परिवर्तन की ओर...
वरना यूँ ही कहता रहेगा
पुरुष समाज
औरतें ही औरतों की दुश्मन है...
हमें उंगली नहीं दिखाना है
हाथ मिलाना है...

रीना मौर्य मुस्कान 
मुंबई महाराष्ट्र

Sunday, 9 July 2017

pyari maa प्यारी माँ




अहसास का सुंदर भाव है माँ
डूबते हुवे जीवन की नाव है माँ
कभी प्यार कभी दुलार
कभी डांट कभी आशीर्वाद
कभी तपती दोपहरी में
शीतल ठंडी छाँव हैं माँ
कष्टों के गागर पर
ममता का सागर लिए
हरदम हरवक्त तैयार 
रहती है माँ
कभी माँ कभी सहेली कभी गुरु
हर किरदार निभाती है
मेरी जीवन की बगिया के 
सारे काँटों को तोड़
फूलों से भर देती है
सूखे - सूखे जीवन में
रिमझिम रिमझिम बरसात सी माँ
अहसास का सुंदर भाव है माँ
डूबते हुवे जीवन की नाव है माँ

रीना मौर्य मुस्कान

Tuesday, 9 August 2016

kainwas कैनवास



तितलियों से रंग ले आऊँ ओस की बूंदों संग उन्हें मिलाऊँ जीवन के कैनवास पर एक सुंदर चित्र बनाऊँ जहाँ बहती है नदिया और बहते हैं झरने तल्खियों से परै जहाँ हो सब अपने पूरे हों सबके वो प्यारे मीठे - सपने सुरज , चाँद , सितारों से आसमाँ सजाऊँ फूलों से खुशबू ले आऊँ प्रेम , करुणा , दया से सबका मन महकाऊँ आपका भी हाथ हो आपका भी साथ हो और सुन्दर से अपने सपने को मैं सच कर जाऊँ जीवन के कैनवास पर एक सुंदर चित्र बनाऊँ